गुप्‍त गोदावरी- जो आज भी अबूझ पहेली बनी है

गुप्‍त गोदावरी- जो आज भी अबूझ पहेली बनी है

Thursday, September 3, 2020

चित्रकूटधाम में अधर्म लीला* ( भाग एक)

 - चार किलोमीटर प्रतिबंधित है मादक पदार्थो की बिक्री

*- रामघाट,निर्मोही तिराहा, चोगलिया बाजार,पुराना बस स्टैंड,रामायण मेला के सामने व पीछे,रैन बसेरा के अंदर व बाहर,शिवरामपुर रोड, मलकाना रोड,कालकन मन्दिर के पास में बिक रही शराब व गांजा*

*- हर मोहल्ले में मौजूद है सट्टे का बुकी* *नयागांव,खटकाना,मलकाना,तीर्थराजपुरी के तराई के इलाके में उतर रही है कच्ची शराब*


*करोना काल चल रहा है। करोना से बचने के लिए गाइड लाइन दो गज की दूरी,मास्क और सेनेटाइजर जरूरी का नारा तेजी से चल रहा है। इसी काल मे बाजार के कारीगरों ने एक अच्छा और सुगम व्यवसाय खोज निकाला है। यह व्यवसाय है सेनेटाइजर की अधिकता वाली शराब की बिक्री का। इस व्यवसाय से न केवल पुलिस व आबकारी विभाग को फायदा हो रहा है बल्कि   सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी हो रही है। तीर्थनगरी में प्रतिबंध के बाद भी लगभग एक दर्जन स्थानों पर अंग्रेजी व देशी शराब की बिक्री की जा रही है। नदी के तराई वाले इलाकों पर कच्ची महुआ व बेशरम से बनी शराब उतारी भी जा रही है*

चित्रकूट तीर्थ नगरी है। यहाँ पर मांस,मछली,अंडा और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध है। वैसे चित्रकूट के जिला बनने के बाद प्रतिबन्ध की दूरी कम कर दी गई थी। बांदा जिला से कर्वी व मऊ तहसीलों को काटकर 2007 में शाहू जी महाराज नगर के नाम से जिला बनाया गया। 2000 में कल्याण सिंह के शासन में चित्रकूट को दो अहम पड़ाव मंडल व जिले के रूप में मिले।

 2005 में तीर्थनगरी से मादक पदार्थो की बिक्री की दूरी घटाकर 10 की बजाय 5 किलोमीटर कर दी गई। लिहाजा नई दुनिया मे बिकने वाली शराब बेडीपुलिया तक सिमट आई। वैसे कर्वी कोतवाली के अंतर्गत कच्ची शराब डेलोरा से लेकर बंधोइन तक कई स्थानों पर उतारी जाती रही है। 

कोरोना काल के कुछ समय पहले से तीर्थनगरी में कई स्थानों पर कच्ची शराब उतरना शुरू हुई तो उनकी बिक्री भी शहर के एक दर्जन स्थानों पर चल रही है। इसके साथ ही स्मैक व अंग्रेजी शराब भी आराम से इसके शौकीनों को मिल रही है। सट्टा का खेल बदस्तूर जारी है तो गांजा (मारिजुआना) की लगभग आधा दर्जन स्थानों पर बिक रहा है।

*मादक पदार्थो की बिक्री वाले स्थान*

*🩸रामघाट,निर्मोही तिराहा, चोगलिया बाजार,पुराना बस स्टैंड,रामायण मेला के सामने व पीछे,रैन बसेरा के अंदर व बाहर,शिवरामपुर रोड, मलकाना रोड,कालकन मन्दिर के पास में शराब व गांजा*

*हर मोहल्ले में मौजूद है सट्टे का बुकी* *नयागांव,खटकानामालकाना,तीर्थराजपुरी के तराई के इलाके में उतरती है कच्ची शराब*

*कार्यवाही के नाम पर शून्य*

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार सीतापुर चौकी क्षेत्र में मादक पदार्थो के खिलाफ बहुत दिनों से कोई बड़ी उल्लेखनीय कार्यवाही नही हुई है।

Wednesday, February 22, 2017

मीठी यादों के साथ विदा हुआ नृत्य का विशेष उत्सव


                                    खजुराहो की नृत्‍य भरी शाम
 नटराज के शिष्य परंपरा से जुड़े मनीषियों की प्रस्तुतियों से सजे खजुराहो नृत्य महोत्सव के सात दिन आखिर विदा हो गए। निर्वाण थ्रू डांस की निर्माता और नृत्य भारती, कामायनी, क्लासिकल डांसेज आफ इंडिया सहित तमाम फिल्मों में अभिनय कर चुकी उमा डोगरा के कथक नृत्य की प्रस्तुति इस नृत्य महोत्सव की अंतिम प्रस्तुति बनी। मंगलवार की रात लगभग 9.20 बजे से चालीस मिनट का उनका भावपूर्ण नृत्य लोगों के लिए यादगार बन गया। उमा डोगरा ने खुद कहा कि यह उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति रही। उन्होंने कहा कि वैसे तो उन्होंने देश विदेश के तमाम स्टेजों पर अपना नृत्य प्रस्तुत किया पर यहां पर तो ऐसा लग रहा था कि देवाधिदेव भोले नाथ खुद ही उनका नृत्य देख रहे थे। गीत गोविंद की रचनाओं पर आधारित नृत्य नाटिकाओं में प्रस्तुत किया जाने वाला मार्मिक अभिनय सजीव रहा। देशी और विदेशी पर्यटकों व स्थानीय लोगों की तालियां लम्बे समय तक बजती रहीं।

इसके पूर्व मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अधिकारी व स्थानीय अधिकारियों ने घोषणा की कि खजुराहो डांस फेस्टिवल अगले पांच वर्षो तक 20 से 26 फरवरी को ही होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ निरुपमा एवं राजेन्द्र की समकालीन नृत्य प्रस्तुति से हुआ। तमाम सम्मानों को प्राप्त करने वाली इस जोड़ी ने भरत नाट्यम की प्रस्तुति के दौरान कई बार दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए।

इसके बाद पद्मभूषण गुरु केलुचरण महापात्र की शिष्या ओडिसी नृत्यांगना आलोका कानूनगो ने नृत्य के दौरान श्री कृष्ण और राधा के साथ गोपियों की रास लीला के दर्शन कराए। खजुराहो डांस फेस्टिवल की अंतिम शाम में विदेशी और देशी पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोग भारी संख्या में मौजूद रहे।

Sunday, July 14, 2013

दो घंटे की बरसात से भरा 8 फिट गहरा तालाब

महोबा, स्टाफ रिपोर्टर: जल संरक्षण के लिए दूसरों को नसीहत देने के पहले एसपी ललित कुमार सिंह ने वह कर दिखाया जिसके कारण अब वह हर मिलने वाले को पानी बचाने के लिए तैयार करने का काम कर रहे हैं। बात बहुत पुरानी नही है, लगभग डेढ़ महीने पहले यहां पर आए पुलिस कप्तान ने देखा कि पानी की भारी किल्लत है। शहर में पानी की किल्लत के कारण लोग रात रात जागकर पानी भरने के काम करते हैं। ऐसे में उन्होंने जब सुना कि मुख्यमंत्री ने यहां के तालाबों को पुर्नजीवन देने के लिए घोषणाएं की हैं, और डीएम खुद भी किसानों के पास जा जाकर उन्हें तालाब खोदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो उन्होंने पुलिस लाइन में पूर्व कप्तान देवी सिंह अशोक के द्वारा खुदवाए गए छोटे से तालाब पर काम लगवा दिया और तीन दिनों के अंदर गुरदयाल सिंह कटियार ने एक बड़े तालाब की शक्ल देकर खुदवा दिया। इसको बनाने के साथ ही पुलिस लाइन की अधिकांश जमीन का स्लोप इस तालाब में कर दिया। इसके लिए पूरी लाइन में पक्की नालियों का भी निर्माण कराया गया। सबसे सुखद बात यह रही कि 18 जून को बरसे दो घंटे के तेज पानी में यह तालाब लबालब भर गया। जिसके कारण इसको देखकर सभी को हैरत हो रही है। तालाब में पानी भरते देखकर एसपी ललित कुमार सिंह अब अपने पास आने वाले हर एक व्यक्ति को पानी के संरक्षण के लिए न केवल प्रेरित कर रहे हैं बल्कि उसे बताने का प्रयास भी करते हैं कि जब एक बरसात से एक तालाब भर सकता है तो बाकी के तालाब क्यों नहीं। केवल लगन के साथ सभी को लगने की अवश्यकता है फिर किसी भी गांव में पीने व सिंचाई के पानी की आवश्यकता नही रहेगी। वह बताते हैं कि जल्द ही इस तालाब में पैडल वोट डलवाने के साथ ही कमल लगवाया जाएगा। साथ ही तालाब के बगल में खाली जमीन पर नव गृह व नक्षत्र वाटिका भी बनाई जाएगी। जिससे आम लोगों को पौधों को संरक्षित करने के बारे में प्रेरणा मिले।

झूमकर बरसी बरखा ने दी तालाबों को संजीवनी

संदीप रिछारिया, महोबा: कम से कम अब तो पानी के लिए सिर नहीं फूटेंगे, अगर यही हाल रहा है तो इस साल क्या आने वाले कई सालों तक महोबा में पानी के लिए किच किच नही होगी। यह और कुछ ऐसे ही जुमले लोगों के मुंह से अनायास ही निकल रहे हैं। इस बार तो पानीदार बुंदेलों को पानी ने भी अपनी पानीदारी दिखा दी है। केवल जून महीने के 12 दिनों के भीतर ही 340 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। इस बारिश के चलते जहां जिले में मौजूद लगभग हर जलाशय की शक्ल बदली सी दिखाई दे रही है, वहीं जिलाधिकारी की पहल पर खोदे गए नए खेत तालाब भी पानी से लबालब भरे दिखाई दे रहे हैं। सिचाई विभाग के तार बाबू नारायण सिंह की मानें तो इस बार की बरसात वास्तव में सुकून देने वाली हो रही है। हो सकता है कि वर्ष 2003 के बाद इस साल सभी तालाब व बंधे पूरी क्षमता से भर जाएं। उन्होंने पिछले साल 600 मिमी पानी गिरा था, वरना पिछले 9 सालों में कभी भी बरसात 500 मिमी से ऊपर हुई ही नहीं। वैसे उस बरसात से कोई ज्यादा फायदा नही मिला, क्योंकि एक दिन में 50 मिमी पानी गिरने के बाद पन्द्रह दिनों के सूखे और तेज धूप ने उस पानी को उड़ा दिया। वह बताते हैं कि अभी शहर के बीजा सागर व कीरत सागर दो ही तालाब हैं जो डेड स्टोरेज के आसपास हैं। इसके अलावा मदन सागर, कल्याण सागर, दसरापुर, अर्जुन बांध, चंद्रावल बांध, कबरई बांध, मझगंवा बांध, उर्मिल बांध, बेलासागर, थाना तालाब, उरवारा तालाब, रैपुरा तालाब, सलारपुर तालाब, रहलिया तालाबों में पानी डेड स्टोरेज क्षमता से आगे बढ़कर दो फिट से लगाकर 8 फिट तक आ चुका है। पानी का लगातार बरसना सुकून दे रहा है। जून के महीने में ही इतनी अच्छी बरसात हो गई है कि नए तालाबों के साथ ही पुराने तालाबों को जल की संजीवनी मिल गई। इस बार नए खेत तालाब खुदवाने का लक्ष्य 100 का था। लगभग सभी तालाबों में भरपूर पानी आ गया है। इससे न केवल किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि जलस्तर भी बढे़गा। आने वाले वषरें में किसान और भी तालाब बनाएंगे। जिससे महोबा की पानीदारी और बढ़ सके।-अनुज कुमार झा, डीएम तालाबों में पानी की स्थिति .. 1 जुलाई मदन सागर - 5.25 फिट कीरत सागर- डेढ स्टोरेज. लगभग दस फिट पानी कल्याण सागर- 5 बीजासागर- डेढ स्टोरेज दसरापुरा- 6 उरवारा तालाब- 3 रैपुरा तालाब- 8 थाना तालाब- 2 सलारपुर तालाब- 2 फिट रहलिया तालाब- 3 फिट अर्जुन बांध- 179.79 मीटर चंद्रावल बांध - 148.74 मीटर कबरई बांध- 149.04 मीटर मझगवां बांध -217.93 मीटर उर्मिल बांध- 230.00 मीटर

चारागाहों से जल्द हटवाया जाएगा अतिक्रमण

महोबा, स्टाफ रिपोर्टर: जल्द ही अभियान चलाकर सार्वजनिक चारागाहों को न केवल अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाएगा, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल व तार बाढ़ से बंद भी कराया जाएगा। यह बातें जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने डीएम कार्यालय के पीछे स्थित पौराणिक स्थल श्री राम कुंड आश्रम की गौशाला का हाल सुनने के बाद कही। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक गौशालाओं की जमीनों पर केवल गौवंश का अधिकार है। इन जमीनों को न केवल खाली कराया जाएगा बल्कि उनकी सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था की जाएगी। चारागाहों की जमीनों के साथ ही गौशालाओं के सही संचालन के लिए समाज के लोगों व अधिकारियों केएक समिति बनाकर संचालन किया जाएगा। शुक्रवार को दोपहर श्री राम कुड के अत्यंत वृद्ध महंत ने जिलाधिकारी को बताया कि आश्रम की गौशाला का हाल काफी खराब है। अराजकतत्व यहां पर हर गलत काम करते हैं और मना करने पर मारते हैं। उन्होंने बताते हुए कहा कि साहब जिंदगी बीत गई, नागा साधू हैं, कभी किसी से कुछ मांगा नहीं, अब अराजक तत्वों द्वारा अपमान सहन नहीं होता, आप इस आश्रम को अपने पजेशन में लें लें तो अति दया होगी, मेरी इच्छा यह है कि कम से कम एक बार आप आश्रम को देख तो लें। डीएम अनुज कुमार झा ने कहा कि गौशाला का हाल खराब है तो यह निसंदेह चिंता का विषय है। उन्होंने आश्रम में आने की बात करते हुए कहा कि जिले की सभी गौशालाओं में भूसा व चारे की व्यवस्था के मुकम्मल इंतजाम किए जा रहे हैं। कहा कि सार्वजनिक चारागाहों की जमीनों को तार बाढ़ से बंद करवाकर उसका उपयोग समाज के लोगों व अधिकारियों की संयुक्त कमेटी से करवाया जाएगा। इस दौरान नरसिंह कुटी के महंत विश्वम्भर दास व आल्हा परिषद के अध्यक्ष शरद तिवारी ने बताया कि यह स्थान रामायण काल का है। यहां के कुंड का पानी तमाम बीमारियों को दूर करता है। गौशाला में गायों की कम होती संख्या का कारण उन्हें कसाईखाने में भेजा जाना है। डीएम ने इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार कर कार्यवाही करने की बात कही।

गायब हो गई 636 एकड़ जमीन

संदीप रिछारिया, महोबा: शासन की ओर से लगातार पत्र पर पत्र आ रहे हैं कि बालिकाओं की शिक्षा व्यवस्था ठीक करने के लिए हर ब्लाक में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खोले जाएं, खुद का भवन बनवाया जाए, पर जैतपुर ब्लाक में एक अदद भवन के लिए जमीन नही मिल रही है। सवाल खड़ा होता है कि आखिर सार्वजनिक चारागाह की 636.98 एकड़ जमीन कहां गायब हो गई? वैसे इस सवाल का जवाब वर्षो पहले जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) द्वारा तत्कालीन डीएम को नाम और नम्बर सहित देकर बताया गया था कि इस जमीन पर लगभग 123 लोग कब्जा कर बकायदा उसकी फसल का उपयोग कर रहे हैं, तथा कई जमीनों पर तो पक्के मकान भी खड़े हो चुके हैं। वैसे यह जानकारी उन्होंने अपने आप नहीं बल्कि एक आरटीआई के जबाब में दी थी। लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी इन जमीनों को अनाधिकृत रूप से कब्जे करने वालों से मुक्त कराना मुनासिब नही समझा गया। इस प्रकरण की आरटीआई डालने वाले वरिष्ठ नागरिक जीवन लाल चौरसिया कहते हैं कि सार्वजनिक भूमि को मुक्त कराने के पीछे जिला प्रशासन की मंशा ही स्पष्ट नही है, क्योंकि जमीनों पर कब्जे नौकरशाहों और सफेदपोश नेताओं व माफियाओं ने मिलकर किए गए हैं। चारागाह की जमीनों पर पट्टे कराकर लोग पेट्रोल पम्प के साथ आलीशान मकान बन चुके हैं। वह कहते हैं कि जमीनों की इंतखाब खतौनी में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि यह जमीनें श्रेणी (5)(3) स्थाई गौचर भूमि और चराई की अन्य भूमियों में आती है। इसका पट्टा किसी प्राइवेट व्यक्ति को किया ही नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि खतौनी खाता संख्या 1449 सन् 1378 लगायत 1380 के बाद किन खातेदारों के नाम अंकित हुई है, इनके संबंध में आख्या मंगवाने की गुजारिश खुद शासकीय अधिवक्ता ने की थी और उन्होंने इसके लिए बकायदा चारागाह में खाते अंकित कराने के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति भी चाही थी, पर हुआ कुछ नहीं। 0-------------------- जानकारी मिली है, इसकी पूरी जांच करवाई जाएगी और दोषियों को सजा दिलवाने के साथ सार्वजनिक भूमि को अभियान चलाकर कब्जों से मुक्त कराया जाएगा।-अनुज कुमार झा, डीएम।

Friday, March 29, 2013

पैरों की लयात्मकता में बरसा संगीत

महोबा, स्टाफ रिपोर्टर : विलक्षण. अद्भुत की आवाजों के साथ ही तालियों की गड़गड़ाहट .. जी हां, खजुराहो के चंदेली मंदिर समूह के ओपन सभागार में जैसे ही घुंघरूओं से बंधे पैरों की लयात्मकता बढ़ी वैसे ही उपस्थित लोगों के हाथों से तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। उमा सत्यनारायण की वरिष्ठ शिष्या माने जाने वाली अन्वेषा दास के द्वारा भरतनाट्यम नृत्य के दौरान 'अरंगेत्रम' के दौरान तो लोग मंत्र मुग्ध हो गए, ऐसा लगा कि सैकड़ों लोग सांस रोककर नृत्य का आनंद ले रहे हैं।

ओडिसा की रहने वाली चेन्नई में पली बढ़ी अन्वेषा दास के नृत्य की विशेषता उनका भाव प्रवण अभिनय था। इसके पश्चात ओडिसी के सुविख्यात गुरु केलु चरण महापात्र, कुमकुम मोहन्ती, मायाधर राउत के शिष्य पूर्णा श्री राउत व लकी मोहंती ने जब युगल नृत्य प्रस्तुत किया तो उसमें उड़िया छाप साफ दिखाई दी। नृत्य में भगवान जगन्नाथ की आराधना साफ झलकी। मुद्राओं और चितवन के साथ पैरों की थिरकन बिलकुल तबले की थापें गिनी जा सकती थी। इस बीच बलभद्र और सुभद्रा का संवाद भी काफी सराहा गया। डा. वेंकट वेम्पति व वेम्पति रवि शंकर का कुचिपुड़ी नृत्य न केवल आकर्षक मुद्राओं के लिए दर्शनीय बना बल्कि उनका जोश और पथ संचलन दर्शकों की तालियों का कारण बना। खजुराहो नृत्य उत्सव की अंतिम प्रस्तुति के दौरान दर्शकों का उत्साह इतना बढ़ा कि वह लोग खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे। स्थानीय दर्शकों के अलावा फ्रांस, जर्मनी, चेकोस्लाविया, नामीबिया, ब्राजील के अलावा तमाम देशों के दर्शक मौजूद रहे।


घुंघरुओं की रुन झुन से गूंजे देवालय

संदीप रिछारिया, खजुराहो (महोबा): एक बार फिर खजुराहो में बने विशेष मंदिरों के ओसारे जगमग हो उठे। सैकड़ों साल पहले के दृश्यों की पुनरावृत्ति दिखाई दी। इस बार यहां पर राजदरबार नहीं बल्कि आम आदमी के साथ ही तमाम देशों से आए सैलानी व कला समीक्षक थे। खजुराहो नृत्य समारोह के दूसरे दिन देर शाम जयपुर घराने की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना टीना ताम्बे ने कथक प्रस्तुत कर सभी को वाह- वाह करने पर मजबूर कर दिया। रंजना ठाकुर व डा. सुचित्रा हरमलकर की इस शिष्या ने जब पूरी रवानगी के साथ ही छोटी छोटी टुकड़ी व परनों के साथ आंखों व हाथों की भंगिमाओं की प्रस्तुति की तो देशी तो देशी विदेशियों की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रहीं थी।

इसके बाद गंगा अवतरण के साथ ही देश के तमाम धर्मस्थलों की विशेषताओं व स्थान देवताओं के महत्व को उजागर करता नृत्य फ्रांसीसी मोहनी अट्टम की नृत्यांगना ब्रिजिट शतनियर ने समकालीन नृत्य मोम चटर्जी गांगुली ने प्रस्तुत किया। गंगा की प्रस्तुति के दौरान उन्होंने न केवल इसे पवित्र नदी करार दिया बल्कि स्त्री के तात्विक मूल्यों का चित्रण किया गया। फ्रांस और भारत में समान रूप से रहने वाली ब्रिजिट शतनियर ने एक बारगी गंगा के अवतरण के दृश्य में रवानी ला दी और लोग खड़े होकर तालियां पीटने को मजबूर हो गए। गुरुवार की अंतिम प्रस्तुति शर्मिला विस्वास व उनके साथियों ने दी। मोहनी अट्टम के बाद केलूचरण महापात्र की इस शिष्या ने महरी नर्तकों के जीवन चरित्र के बारे में प्रस्तुति दी।

इसके पूर्व बुधवार को खजुराहो नृत्य समारोह का शुभारंभ मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा किया। समारोह की पहली प्रस्तुति राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी व उनके साथियों ने दी। कथक की भाव भंगिमाओं को देखकर लोग आनंदित हो उठे थे। इसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली की पत्‍‌नी सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना डोना गांगुली व रघुनाथ दास ने ओडिया व समकालीन युगल नृत्य प्रस्तुत किया। पहले दिन की अंतिम प्रस्तुति उमा नम्बूदिरीपाद सत्यनारायण के भरतनाट्यम से हुई।

इस दौरान केरल की प्रदर्शनकारी कलाओं की कला यात्रा से संबंधित कला प्रदर्शनी नेपथ्य, मप्र राज्य रूपकंर कला प्रदर्शनी एवं पुरस्कार व आर्ट मार्ट जैसी प्रदर्शनियां भी देशी विदेशी दर्शकों को रोमांचित कर रही हैं। इसके साथ वस्त्र बुनाई व वस्त्र छपाई की प्रक्रिया को दर्शाता आर्ट मार्ट का हुनर एक विशेष तरह का उत्साह प्रस्तुत करता है।

शिक्षण के साथ ही सामाजिक सरोकारों से भी वास्ता

संदीप रिछारिया, महोबा: सर्व शिक्षा अभियान के तहत जहां बच्चों को विद्यालयों में शिक्षण व प्रशिक्षण से नई तकनीकि व अत्याधुनिक ढंग से पढ़ाई करवाने के प्रयास चल रहे है, वहीं जिले के कुछ स्कूलों में सीधे तौर पर जन सरोकारों से भी जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं। जल संरक्षण की दिशा में प्राथमिक विद्यालय बरा में किए गए प्रयास से बुंदेलखंड की एक बड़ी समस्या पानी से लड़ाई लड़ने में मदद मिलेगी।

प्यास से जूझती इस बुंदेली धरा पर बच्चों के अंदर पानी बचाने के भावना को जन्म देने का काम जिलाधिकारी डा. काजल ने किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी को यह निर्देश दिए पानी बचाने का प्रारंभ विद्यालय से ही करवाया जाए। विद्यालय के जल को विद्यालय में ही दफन कर दिया जाए। फिर क्या था आनन फानन में बरा गांव के प्राथमिक विद्यालय का चयन कर इनको बनवाने की जिम्मेदारी न्याय पंचायत भंडरा के केंद्रीय प्रधानाध्यापक विवेकानंद गुप्ता को सौंपी गई। इस काम में उनके सहभागी एबीआरसी अनिल शुक्ला बने।

केंद्रीय प्रधानाध्यापक बताते हैं कि वाटर हार्वेस्टिंग के इन प्रयोगों को बनवाने में कुछ ज्यादा खर्च नहीं आया और यह माडल इतने बढि़या बने कि बच्चों के अंदर पानी को बचाने की भावना तेजी से पनप रही है। उन्होंने बताया कि विद्यालय की छत व जमीन में स्लोप बनाकर उन्हें तीन और चार फिट के दो गड्डों से मिला दिया गया। गड्डों को सोलम, बजरी, गिट्टी व जीरा गिट्टी से इस प्रकार भर दिया गया कि बच्चे उसमें आराम से खेल भी सकते हैं। यहां पर विद्यालय कैंपस का पूरा बरसात व रोजमर्रा का पानी आ जाता है। कुछ छत्तीस हजार के खर्च में तैयार इस प्रोजेक्ट के कारण विद्यालय का पानी विद्यालय में ही रुक रहा है।

..पानी बचाने का प्रयोग सफल है। इस प्रयोग को शासन स्तर पर भेजकर इसे मान्यता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव ऊपर स्वीकार कर लिया जाता है तो हर प्रदेश के हर विद्यालय में लागू होने से न केवल पानी बचाने में मदद मिलेगी बल्कि बच्चों के अंदर पानी को बचाने की भावना भी बढे़गी।

मसीह हुज्जमा सिद्दीकी

बेसिक शिक्षा अधिकारी

इस विद्यालय का प्रोजेक्ट बनाकर प्रमुख सचिव को भेजा गया है। उन्होंने इस काम को देखकर बधाई भी दी है, साथ ही इस काम को पूरे प्रदेश में लागू करवाने के लिए विचार विमर्श भी चल रहा है। आगे भी इस तरह के समाजोपयोगी कार्य किए जाते रहेंगे।

.. डा. काजल

जिलाधिकारी

Thursday, March 28, 2013

बुंदेलखंड में तैयार होते हैं गुलाबी शहर के घरानेदार कलाकार

संदीप रिछारिया,महोबा

अकल्पनीय है पर बिलकुल सत्य. बुंदेलखंड की इस वीर भूमि अब तलवारों की जगह घुंघरुओं की झनकार और अलापों के स्वर शांति और सद्भाव का संदेश देते हैं। चक्करदार परनों और आरोह अवरोध के बीच यहां पर देश भर से आने वाली प्रतिभाओं को विश्व आकाश रूपी रंगमंच पर उड़ने को तैयार किया जा रहा है। यह काम पिछले तीस सालों से अनवरत जारी है शहर के किशोर कला मंच में। देश के विभिन्न भागों से आकर बेटियां इस गुरुकुल पर शास्त्रीय संगीत के साथ ही लोक संगीत की शिक्षा लेकर विश्व भर में अपनी खुशबू फैलाने का काम कर रही हैं।

छतरपुर की रिंकी चौरसिया, गुजरात के सूरत शहर की कृष्णा राजपूत, मध्य प्रदेश के शिवपुरी की सोनम कुलश्रेष्ठ, पनवाड़ी की चंचल राजपूत महोबा की राम जानकी व अभिलाषा सिंह कहती हैं कि शिक्षा के साथ संस्कार और संगीत की यह शिक्षा उन्हें मामूली से विशेष बनाने का काम कर रही है।

जयपुर घराने से एमम्यूज नवल महाराज कहते हैं बालिकाओं को यहां पर नि:शुल्क आश्रम पद्धति से संगीत का शिक्षण दिया जाता है। अभी तक 8 बैच यहां से शिक्षण पूरा कर जा चुके हैं। यहा से निकले छात्र कनाड़ा के साथ ही देश के तमाम हिस्सों में जाकर कला के जरिए नाम कमा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि छात्राएं उनके पास देश भर से आती हैं। वह यहां पर रहकर संगीत भूषण, विशारद, भास्कर व एम म्यूज की शिक्षा ग्रहण करती हैं। तमाम बेटियां जवाहर नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, संगीत विद्यालय, महाविद्यालयों में संगीत की शिक्षा प्रदान कर रही हैं।

Wednesday, May 23, 2012

अगली बार बच्चों की व्यवस्था करके आऊंगी

संदीप रिछारिया, रायबरेली : क्या करूं जाने का मन तो नहीं करता। लेकिन बच्चों को भी देखना है। इस बार उनकी व्यवस्था करके नहीं आयी हूं। आप सभी परेशान न हों दो फरवरी को फिर आ रही हूं। फिर चुनाव तक यहीं रहूंगी तब तक की जिम्मेदारी आप लोगों पर है। तीन दिनों तक नेहरु गांधी परिवार के रिश्तों की मिठास बांटने के बाद कुछ इसी तरह के वादों के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा बुधवार को रायबरेली से रवाना हो गयीं। इससे पहले सुबह हरचंदपुर और बछरांवा विधानसभा के प्रत्याशी शिवगणेश लोधी व राजाराम त्यागी से प्रियंका ने मुलाकात की। कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक पहुंचाने और मतदाताओं में मजबूत इरादों के साथ जाने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता इस चुनाव को हलके में न लें। चुनाव में जीत को प्रतिष्ठा बनाकर लें तभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आएगी। बैठक के दौरान लोगों ने उनके काफी समय बाद रायबरेली आने की शिकायत की तो उन्होंने अपनेपन के अंदाज में सभी को संतुष्ट करने का प्रयास किया। प्रियंका ने कहा अब ऐसा नही होगा। दो फरवरी को फिर से आ रही हैं तब वे चुनाव का पूरा संचालन यहीं पर रह कर करेंगी। प्रियंका गांधी ने अपनी टीम के किशोरी लाल शर्मा, सुनील श्रीवास्तव, निर्मल शुक्ला, सईदुल हसन को जहां हर एक फरियादी को उसकी समस्या से निजात दिलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर आता है तो उसका निदान अपने स्तर से करें यदि कोई परेशानी आती है तो तुरंत उन्हें अवगत कराया जाए। वहीं जिलाध्यक्ष उमाशंकर मिश्र, महामंत्री विजय शंकर अग्निहोत्री, विनय द्विवेदी आदि को कहा कि हर क्षेत्र में बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता के साथ लगातार संवाद कर टीम को मजबूत कर कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों की जीत को सुनिश्चित करें। पार्टी प्रत्याशियों का विरोध करने वालों को भी मूक शब्दों में सचेत करते हुए कहा कि यह समय आपसी विवाद में पड़ने का नहीं है। सभी को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।

Wednesday, August 31, 2011

भारतीय नाट्यशास्त्र ही सभी प्रकार के अभिनय का आधार

दुनिया जहान को तरंगित करने की कूबत रखते हैं हिंदुस्तानी नाटक
संदीप रिछारिया, रायबरेली :जीवन एक रंगमंच है और हम उसके अभिनेता। हमारे जीवन के सम्पूर्ण अभिनय की डोर परमेश्वर के हाथ में होती है और वह जैसे चाहता है वैसे ही हमसे अभिनय कराता है। जी हां, अभिनय की ग्लैमरस दुनिया की शुरूआत नाटकों के जरिये ही होती है और बड़े से बड़ा नाटककार जागते सोते अपनी जिंदगी में अभिनय करता रहता है। यह बातें जागरण कार्यालय में एनएसडी नई दिल्ली से आये राकेश सिंह ने कहीं।
उन्होंने नाटकों के मूल स्वरूप की व्याख्या के दौरान कहा कि वास्तव में प्राचीन नाट्यशास्त्र ही हर एक प्रकार के अभिनय का आधार है। इस विधा के विभिन्न अवयव नृत्य व अभिनय इसको दर्शकों को संप्रेषित करने का काम करते हैं। उन्होंने नाट्यकला में हो रहे नये प्रयोगों को नये जमाने की जरूरत बताते हुये कहा कि अब नाटकों से आदि और अंत गायब हो रहे हैं और उनमें देश, काल, रीति, स्थिति व परिस्थिति के अनुसार तमाम परिवर्तन हो रहे हैं। वैसे अब समाज में नाटकों को देखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आज भी देश के नामचीन अभिनेता नाटकों पर अक्सर अपनी अभिनय क्षुधा को शांत करने के लिये दिखाई दे जाते हैं।
उनके साथ ही आये इप्टा के स्थानीय संयोजक संतोष डे ने बताया कि आज भी नाटकों के अलावा वे लोक कलाओं को संरक्षित करने का काम कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर उनकी टीमें लोक कलाकारों की पहचान कर उनके कार्यक्रमों को प्रदर्शित कराने का काम करती रहती हैं।

खुशखबरी : जिले की पौने दो लाख से ज्यादा बेटियां होंगी सबला

जागरण विशेष
संदीप रिछारिया, रायबरेली : अब चिंता करने के जरूरत नही क्योंकि केंद्र सरकार ने दस वर्ष की उम्र के बाद से हाथ पीले करने की उम्र तक पहुंचने के पहले ही बेटियों को 'सबला' बनाने की मुहिम तेज कर दी है। सभी बेटियों को न केवल पोषित खाद्यान्न देने की पूरी व्यवस्था की गई है बल्कि उन्हें एक समझदार मां के साथ समझदार पत्‍‌नी बनाने के लिये भी सरकारी अमले ने कमर कस ली है।
वैसे तो बुधवार को यूपीए अध्यक्ष व जिले की सांसद सोनिया गांधी आईआईटी स्टेडियम में तमाम बालिकाओं, महिलाओं व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को संबोधित करेंगी पर अभी से बाल विकास और पुष्टाहार विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इस बात को लेकर प्रसन्न हैं कि सभी बेटियों को सबला बनाने में अब कोई दिक्कत नही है। पहले तो एक केंद्र से केवल तीन बेटियों का ही चयन किशोरी शक्ति परियोजना के अन्तर्गत होता था पर अब केंद्र सरकार की इस योजना से एक नये भारत का निर्माण होगा। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रावती सिंह कहती हैं कि वैसे तो जिले में 11 से 18 साल तक की 1 लाख 79 हजार 100 बालिकाओं का सर्वे सभी केंद्रों पर किया जा चुका है। सभी सीडीपीओ और मुख्य सेविकाओं की ट्रेनिंग भी इस कार्यक्रम को चलाने के लिये हो चुकी है। फरवरी में केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह योजना वास्तव में किशोरी शक्ति योजना का विस्तार है। पहले इस योजना में हर केंद्र से तीन बालिकाओं का चयन कर उन्हें ंिलाई, बिनाई, कढ़ाई व साफ्ट ट्वायज बनाने का प्रशिक्षण स्वयंसेवी संगठनों के द्वारा दिया जाता था। अब केंद्र में आने वाली सभी 11 से 18 साल तक की बेटियों के लिये पुष्टाहार के साथ ही शिक्षण और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी। इसके साथ ही पन्द्रह साल से अठारह साल तक की बेटियों के लिये अतिरिक्त मानवीय शिक्षा की व्यवस्था की गई है। यह शिक्षा उन्हें आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता व आशा के सहयोग से दी जायेगी। इस प्रशिक्षण में उन्हें न केवल गृहोपयोगी वस्तुओं को बनाने के प्रशिक्षण दिलाया जायेगा बल्कि परिवार नियोजन, गर्भवती का स्वास्थ्य, बच्चे की देखभाल, कुपोषण से संबधित आवश्यक जानकारियों से भी लैस कर उनकी आने वाले जीवन को मंगलमय करने का प्रयास किया जायेगा।
सबला होने वाली बालिकाओं की संख्या
11 से 18 साल तक की कुल बालिकाओं की संख्या - 179100
11 से 14 साल की स्कूल जाने वाली बालिकाओं की संख्या - 75660
11 से 14 साल की स्कूल न जाने वाली बालिकाओं की संख्या - 1745
15 से 18 साल की स्कूल जाने वाली बालिकाओं की संख्या- 57744
15 से 18 साल की स्कूल न जाने वाली बालिकाओं की संख्या- 28649
ये बनायेंगे सबला
जिला कार्यक्रम अधिकारी
16 ब्लाकों में कार्यरत 12 सीडीपीओ
83 पद स्वीकृत में 79 मुख्य सेविकायें
2127 में से 2076 आंगनबाड़ी कार्यक‌र्त्री
2063 सहायिकायें व
232 में से 170 संचालित मिनी आंगनबाड़ी केंद्र
ऐसे होगी पूरी परियोजना
सर्वे के बाद अब हर केंद्र पर बालिकाओं के प्रशिक्षण के लिये महिला कल्याण निगम एक-एक स्वयं सेवी संगठन के चयन का काम कर रहा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह काम जून के प्रथम सप्ताह तक हो जाने की उम्मीद है। 60 से 90 दिन के प्रशिक्षण के बाद बालिकायें स्वयं रोजगारी भी बन जायेगी।

Sunday, August 14, 2011

मुफलिसी में जी रहे हैं तो क्या हुआ, गुलाम तो नहीं हैं..

संदीप रिछारिया, रायबरेली : पहले गोरों के जुल्म ओ सितम सहे और फिर अपनों के, पर न कोई गिला है और न सिकवा है। इनकी मुफलिसी ही इनकी पहचान है क्योंकि आज भी इनके दिल से आवाज निकलती है कि 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी'।

मिट्टी की बनी जर्जर दीवार पर टिके छप्पर की छांव में बैठे महादेव अपनी पत्‍‌नी संग गरीबी और मुफलिसी की चाहे जो पीड़ा बयां कर रहे हों। पर उनकी आंखों में अपने पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद 'महावीर' को लेकर गर्व की अनुभूति साफ झलक रही थी।
शहीद किसान आंदोलन में किसान नेता अमोल शर्मा और बाबा जानकी नाथ को विदेशियों के चंगुल से आजाद कराने के लिए सई नदी के तट पर एकत्रित हुए जनसमूह में महावीर भी शामिल थे। किसानों के अहिंसक आंदोलन में 7 जनवरी 1921 को मुंशीगंज में अंग्रेजों ने बर्बरता का परिचय देते हुए ताबड़तोड़ गोलियां चलायी। गोलीकांड में लगभग 750 किसान शहीद हो गये और सैकड़ों घायल। इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगाकर देशप्रेमी महावीर के पैर में गोली लगी और वे बेसुध हो जमीन पर गिर पड़े। अंग्रेजों द्वारा स्थापित अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया। आठ दिन तक इलाज चला। एक दिन मौका पाकर वह अस्पताल से भाग निकले। अंग्रेजों ने उनका पीछा किया पर वो उनकी पकड़ में नहीं आये। नाकामी से खिसियाये अंग्रेजों ने उनका घर तबाह कर दिया और उनकी 12 बीघे जमीन अपने कब्जे में ले ली। अंग्रेजों से छिपते छिपाते देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ते-लड़ते 1940 में वो स्वर्गलोक सिधार गये। उनकी मौत के बाद उनकी पत्‍‌नी द्विजा देवी पर चार बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आयी। उनमें भी देशप्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। उन्होंने अंग्रेजों की बर्बरता का सामना कर बच्चों का पालन पोषण किया।
राही विकासखंड के पूरे रती मजरे बेलाखारा में रह रहे उनका एक पुत्र महादेव(60) अपनी पत्‍‌नी संग पुश्तैनी मकान (जो कि अब पूरी तरह जर्जर हो गया है) में रह रहा है। शहीद महावीर के बड़े पुत्र राउरदीन (80) गांव से बाहर कुटिया बनाकर सन्यासी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। दोनों ने बताया कि पिता और बाबा की शहादत से आज हम स्वतंत्र देश में सांस ले रहे हैं जो कि सरकारी सुविधाओं से कहीं बढ़कर है।

..गुमनाम न जाने कितने हैं

रायबरेली, निज प्रतिनिधि: वे लोग जिन्होंने खून देकर हर फूल को रंगत बक्शी है, दो चार से दुनिया वाकिफ है गुमनाम न जाने कितने हैं.. किसान आंदोलन में शहीद बुधई पासी की लाट पर लिखी ये पंक्तियां उन गुमनाम शहीदों के दर्द को बयां करती हैं जिन्होंने देश की आजादी में अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।
नाना के घर फरवरी 1890 में जन्मे बुधई बचपन से ही स्वाभिमानी, सरल और दयालु प्रवृत्ति के थे। बदमाशों द्वारा परेशान किए जाने के चलते उनके पिता कल्लू परिवार सहित भांव के काटीहार गांव में आ बसे। निर्धनता के चलते वह पढ़ाई न कर सके, फिर भी अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति वे सजग थे। बाबा रामचंद्र दास, बाबा जानकी दास और ज्ञानानंद के नेतृत्व में चल रहे किसान आंदोलन में शामिल हो गये। सात जनवरी को मुंशीगंज पुल पर अंग्रेजों और ताल्लुकेदारों की दरिंदगी का सामना करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।
सात जनवरी 1993 को तत्कालीन विधायक अशोक कुमार सिंह ने उनके गांव में उनकी समाधि पर स्मारक की स्थापना की। शुरुआत में तो गांव में शहीद बुधई की पुण्यतिथि पर मेला लगता था, पर धीरे-धीरे वो भी विलुप्त हो गया। वर्तमान समय में गांव में उनके परिवार के लगभग सौ लोग निवास कर रहे हैं। सभी मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। उनके नाती राम किशुन ने बताया कि विधायक अशोक सिंह के सहयोग से गांव में उनकी समाधि पर स्मारक बनवाया गया। इसके अलावा परिवार को आज तक कोई सहायता नहीं मिली।

बदहाल शहीद स्मारक
गांव में मेन रोड के किनारे स्थापित शहीद बुधई पासी का स्मारक देखरेख के अभाव में बदहाल होता जा रहा है। स्मारक के चारो ओर गंदा पानी और कीचड़ भरा रहता है। स्मारक की नींव के ईट निकल गये हैं। जन प्रतिनिधियों को भी शहीद की शहादत याद दिलाने वाले स्मारक की दयनीय हालत दिखायी नहीं दे रही है।

मानव स्वास्थ्य से खेले तो भुगतोगे

संदीप रिछारिया, रायबरेली : मिलावटखोर दुकानदारों के लिये बुरी खबर है! अब मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना दुकानदारों को मंहगा पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश शासन ने भी खाद्य पदार्थो में मिलावट की रोकथाम के लिये केंद्र के द्वारा प्रस्तावित कानून को लागू करने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार को इस कानून के गजट हो जाने के बाद अब न केवल जिला खाद्य निरीक्षकों का पद नाम बदल गया बल्कि अब उन्हें और भी ज्यादा अधिकार दे दिये गये हैं। खाद्य पदार्थो के नमूने की जांच रिपोर्ट अब चौदह दिनों में आनी जरूरी होगी। जबकि गंभीर मामलों को कमिश्नरी लेबल पर स्पेशल मजिस्ट्रेट की अदालत में चलाया जायेगा जिसमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास करना मुकर्रर की गई है। वैसे स्थानीय स्तर पर भी मुकदमें अपर जिलाधिकारी सुनेंगे और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना व जेल भेजने का अधिकार उन्हें प्राप्त होगा।
मुख्य खाद्य निरीक्षक संदीप कुमार चौरसिया ने बताया कि अब न केवल उनका पदनाम बदल गया है बल्कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये विभागीय कर्मचारियों के हाथ और भी ज्यादा खुल चुके हैं। बताया कि पहले प्रदेश में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 के अनुसार काम होता था पर पिछली 4 अगस्त को प्रदेश सरकार ने उसे निरस्त कर 5 अगस्त से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 को लागू कर दिया है। वास्तव में यह केंद्रीय कृत कानून है। इसमें एक आईएएस अधिकारी को खाद्य सुरक्षा कमिश्नर का पद दिया गया है। अब उनका पद खाद्य सुरक्षा अधिकारी का होगा जबकि उनके अधीनस्थ खाद्य सुरक्षा अभिहित अधिकारी के नाम से जाने जाते हैं। इस कानून के अनुसार अब किसी भी वस्तु के 4 नमूने लिये जायेंगे। एक नमूना दुकानदार ले सकता है। वह अपने खर्चे पर किसी लैब से अपने नमूने की जांच करवा सकता है। पहले नमूने की जांच में चालीस दिन का समय लगता था अब इसे घटाकर 14 दिन कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने पर इसमें यह पता चलेगा कि मिलावट का स्तर क्या है। कम गंभीर मामले अपर जिलाधिकारी प्रशासन की अदालत में चलेंगे। वे पांच लाख तक का जुर्माना सुना सकेंगे। इसके अलावा गंभीर मामले खाद्य सुरक्षा कमिश्नर की स्वीकृत के बाद लखनऊ में अपर सत्र एवं जिला न्यायाधीश की अदालत में चलाये जायेंगे। वे अधिकतम सजा आजीवन कारावास की सुना सकेंगे।

Thursday, December 23, 2010

..यहीं पर लिखा गया था अयोध्या कांड

चित्रकूट [संदीप रिछारिया]। आज का 'रामबोला' कल गोस्वामी तुलसीदास बन श्री राम कथा का अमर गायक बन पूरे विश्व में आदर का पात्र बन जायेगा, यह राजापुर के निवासियों ने कभी सोचा भी न था। यह बात और थी कि यह विलक्षण योगी स्वामी नरहरिदास को राजापुर के ही समीप हरिपुर के पास एक पेड़ के नीचे मिल गया और वे उसे उठाकर अपने साथ ले गये। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम व उनकी महिमा से परिचित कराने के साथ ही उन्होंने राम बोला को संस्कार व काशी ले जाकर शिक्षा दी तब वह गोस्वामी तुलसीदास बन सके।

तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य बताते हैं कि वैसे तो संत तुलसीदास चित्रकूट में अपने गुरु स्थान नरहरिदास आश्रम पर कई वर्षो तक रहे और यहां पर उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम व भ्राता लक्ष्मण के दो बार साक्षात् दर्शन भी किये। उन्होंने यहीं पर रहकर रामचरित मानस का पूरा अयोध्या कांड व विनय पत्रिका पूर्वाद्ध भी लिखा।
अभी तक ज्यादातर लोग सिर्फ यही जानते हैं कि तुलसीदास की हस्तलिखित रामचरित मानस की प्रति सिर्फ राजापुर में है पर इस दुर्लभ प्रति को चित्रकूट परिक्रमा मार्ग स्थित नरहरिदास आश्रम में देखा जा सकता है। यही स्थान गोस्वामी तुलसीदास जी का गुरु स्थान है, इसे महल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर पिछले चालीस वर्षो से मंदिर की व्यवस्था का काम देखने वाले स्वामी रघुवर दास बताते हैं कि स्वामी नरहरिदास ने अपने जीवन काल का अधिकांश समय चित्रकूट में ही व्यतीत किया। गोस्वामी जी चित्रकूट में ही पले व बडे़ हुए। वह हमेशा अपने गुरु स्थान पर आते रहे और यहां पर भी वे रामचरित मानस के साथ ही अन्य ग्रंथों की रचना में तल्लीन रहते थे।
उन्होंने रामचरित मानस की एक मूल हस्तलिखित प्रति दिखाते हुए कहा कि यह गोस्वामी जी के हाथ की लिखी गयी प्रति है। इसके लगभग पांच सौ पेज अभी भी सुरक्षित हैं जिसमें सभी कांडों के थोड़े-थोड़े पन्ने हैं। आर्थिक अभावों के चलते वे इसका संरक्षण कराने में अपने आपको असमर्थ बताते हैं। कहा कि न तो मंदिर में आमदनी का कोई स्रोत है और न ही उनके पास किसी तरह की मदद आती है।
उन्होंने बताया कि संत तुलसीदास का लगाया गया पीपल का पेड़ भी यहीं पर है जो उचित संरक्षण के अभाव में गिरने के कगार पर है। चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा तुलसी दास का लगाया पेड़ तो सबकी नजरों के सामने ही है पर उसके संरक्षण और संवर्धन का कोई प्रयास नही करता।

Sunday, August 22, 2010

मानवीय गुणों को दर्शाता महामानव का आचरण

चित्रकूट। प्राकृतिक सुषमा में रची बसी तपोस्थली पर त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने एक ऐसा महाकाव्य रच दिया, जिसने एक साधारण मानव अयोध्या नरेश दशरथ के पुत्र राम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया। आज भी इस भूमि की धूल को साधारण न समझकर रामरज कहा जाता है और उसका वंदन कर पापों के नष्ट होने जैसी मान्यता विद्यमान है। सोलह कलाओं से युक्त जिस महामानव की कल्पना का यथार्थ महर्षि वाल्मीकि ने इस धरती पर देखा था, उसको साकार रूप देने का काम युग ऋषि नानाजी देशमुख की इच्छा पर यहां राम दर्शन के रूप में फलीभूत हुआ। सेठ मंगतूराम जयपुरिया के पुत्र डॉ. राजाराम जयपुरिया के आर्थिक सहयोग से जब नानाजी की कल्पना ने उड़ान भरी तो पांच मंदिरों का समूह कुछ ऐसे रूप में सामने आया कि मानो परब्रह्म पूर्णतम् परमेश्वर का रूप यहां पर पुरुषोत्तम, समाजसुधारक और समाज को नयी दिशा देने के साथ नये युग की शुरूआत करनेवाले श्रीराम नजर आने लगे।
महर्षि वाल्मीकि और बाबा तुलसीदास जी के लिखे रामचरित से नाना जी ने वह प्रसंग और दृश्य निकाले जो श्रीराम को महामानव व युग उद्धारक के रूप में सीधे तौर पर परिभाषित करते हैं। पहले मंदिर में जहां विश्व में रामलीला आयोजित किये जानेवाले देशों के साथ ही वहां के निमंत्रण पत्र व मुखौटों के साथ ही अन्य विवरण मिलते हैं। यहां यह देख कर आश्चर्य होता है कि चीन और सोवियत रूस जैसे कम्युनिस्ट शासन वाले देशों में भी श्रीरामचरित का विस्तार इतने मार्मिक तरीके से किया जा रहा है। कोरिया के राजकुमार का विवाह अयोध्या की राजकुमारी के साथ का दुर्लभ चित्र भी यहां मौजूद है। इसके साथ ही रूस, जापान, वर्मा, कनाड़ा, लाओस, वियतनाम, फ्रांस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार आदि देशों की भाषाओं में लिखी रामायणों के साथ ही वहां पर आयोजित होने वाली रामलीलाओं के दृश्यों को संयोजित किया गया है।
दूसरे मंदिर की शुरुआत श्रीराम के शिक्षा व अध्ययन से होती है। यहां पर शिक्षा का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि विश्वविद्यालय से उपाधियां पाकर या आजीविका की क्षमता अर्जित कर स्वयं को शिक्षित मानना अपने आपको धोखा देना है। मुनि विश्वामित्र द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम लक्ष्मण को मांगना, अहल्या का पुर्नमिलन, राक्षसी ताड़का का वध, उच्च पदाधिकारी बहुलाश्व को प्राणदंड, पीडि़त युवतियों को समाज में उचित स्थान दिलाना, विनयशीलता की कुशलता से परशुराम का क्रोध शांत करना, मां की आज्ञा से भाई को राजपाट देकर खुद चौदह वर्ष के लिए वन में प्रस्थान, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर निषादराज को गले लगाने के साथ ही भीलनी शबरी के हाथों से बेर खाना, चित्रकूट में मुनि वशिष्ठ और मां अनुसूइया से मिलन, भरत के चित्रकूट आने पर उन्हें स्नेह तो दिया पर राज्याभिषेक से इंकार कर वापस उन्हें अयोध्या भेजना, दानवी प्रकृति वाले राक्षसराज रावण से वानर और भालुओं के सहयोग से विजय प्राप्त करने जैसे दृश्य काफी मार्मिक हैं।

..और भी काफी खास है राम दर्शन
नव गृह के साथ ही सत्ताइस नक्षत्रों के पेड़ों के साथ ही रामदर्शन मंदिर समूह की विशेषता है कि यहां की किसी भी मूर्ति की न तो पूजा होती है और न ही कहीं प्रसाद या अगरबत्ती इत्यादि लगाने का प्रावधान है। मंदिर के मुख्य प्रवेशद्वार पर विनयवत श्री राम व जानकी को अपने हृदय में धारण करनेवाले बजरंगबली की विशालकाय प्रतिमा के दर्शन होते हैं तो आगे बढ़ने पर रामचरित के प्रथम प्रणेता महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास जी की विशाल प्रतिमाएँ दिखायी देती हैं।
दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डॉ. भरत पाठक कहते हैं कि नानाजी देशमुख श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में ही पूजा करते थे। वे कहा करते थे कि श्रीराम विश्व के पहले समाजसुधारक थे। रामदर्शन का निर्माण भी इसी भावना के साथ किया गया था कि यहां आने वाले लोग श्रीराम के मानवीय गुणों को देखें और परखें और उसी अनुसारचित्रकूट। प्राकृतिक सुषमा में रची बसी तपोस्थली पर त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने एक ऐसा महाकाव्य रच दिया, जिसने एक साधारण मानव अयोध्या नरेश दशरथ के पुत्र राम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया। आज भी इस भूमि की धूल को साधारण न समझकर रामरज कहा जाता है और उसका वंदन कर पापों के नष्ट होने जैसी मान्यता विद्यमान है। सोलह कलाओं से युक्त जिस महामानव की कल्पना का यथार्थ महर्षि वाल्मीकि ने इस धरती पर देखा था, उसको साकार रूप देने का काम युग ऋषि नानाजी देशमुख की इच्छा पर यहां राम दर्शन के रूप में फलीभूत हुआ। सेठ मंगतूराम जयपुरिया के पुत्र डॉ. राजाराम जयपुरिया के आर्थिक सहयोग से जब नानाजी की कल्पना ने उड़ान भरी तो पांच मंदिरों का समूह कुछ ऐसे रूप में सामने आया कि मानो परब्रह्म पूर्णतम् परमेश्वर का रूप यहां पर पुरुषोत्तम, समाजसुधारक और समाज को नयी दिशा देने के साथ नये युग की शुरूआत करनेवाले श्रीराम नजर आने लगे।

महिला किसानों को सिखाई गई उन्नतशील तकनीक

चित्रकूट। महिला किसानों को उन्नतशील खेती के माध्यम से खेतों से ज्यादा पैदावार लेने के गुरु कृषि विज्ञान केंद्र में सिखाये जा रहे हैं। परिसर में विभिन्न ग्रामों से आई 20 महिलाओं को केंद्र के वैज्ञानिक बदलते मौसम में किसान महिलाओं को खरपतवार से खेतों को सुरक्षित रखने के साथ ही उनसे फसलों को होने वाली हानियों के बारे में भी बता रहे हैं।

केंद्र के वैज्ञानिक विजय कुमार गौतम ने बताया कि खरपतवार जमीन से नमी एवं पोषक तत्वों को अधिक मात्रा में अवशोषित करते हैं। जिससे फसलों की वृद्धि एवं उपज प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि निराई और गुड़ाई से फसल प्रभावित होती है। खरपतवार नियंत्रित होते हैं और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि नमी का संरक्षण होता है।
उन्होंने बताया कि फसलों की बुवाई के पन्द्रह से बीस दिन के अंदर एक निराई करनी चाहिये। खरपतवार नियंत्रण के लिये बाजार में तमाम प्रकार के रसायन उपलब्ध हैं पर उनसे फसल, मनुष्य, जानवर, मित्र, कीट और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। प्रसार वैज्ञानिक संत कुमार त्रिपाठी ने उन्नतशील कृषि यंत्रों व्हील हो, हैंड हो, बीडर और त्रिफाली की जानकारी दी और उनका प्रयोग मूंग और अरहर की फसल पर कराया।
कार्यक्रम समन्वयक डा. छोटे सिंह ने बदलते मौसम को लेकर इस तरह के कार्यशाला प्रशिक्षण लगातार आयोजित किये जाने की बात कही।

Sunday, August 8, 2010

केवल चार महीनों में ही लिख डाला चार करोड़ राम नाम

चित्रकूट। जहां एक तरफ गुरुपूर्णिमा के मौके पर पूरे देश में लोग अपने गुरु की वंदना करने का काम करेंगे वहीं तीर्थ नगरी चित्रकूट के प्रवेश द्वार जिला मुख्यालय में सैकड़ों लोगों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम को ही गुरु मान लिया है। 25 जुलाई को सैकड़ों भक्त न केवल श्री राम के नाम से लिखे पन्नों पर अपने शीश नवायेंगे बल्कि अब उन्होंने अपना गुरु राम के नाम को ही मान लिया है। वैसे भगवान राम की कर्मभूमि तीर्थ नगरी चित्रकूट में यो तो उनके नाम का गुणगान हमेशा से होता चला आ रहा है, एक सौ आठ क्या दस हजार तुलसी के मनकों से जाप करने वाले दर्जनों की संख्या में लोग यहां पर आसानी से मिलते हैं पर जब तारक मंत्र राम नाम के लेखन का काम कार्तिक पूर्णिमा दिन से यहां प्रारंभ किया गया तो पांच साल के बच्चे से लेकर नब्बे साल के बुजुर्ग इस काम में इतनी तन्मयता के साथ जुटे कि आषाढ़ माह की तृतीय तक चार करोड़ राम नाम महामंत्र का लेखन कर डाला।

श्री राम नाम के मंत्र लेखन के काम को आगे बढ़ाने का काम करने वाले हरिश्चंद्र अग्रवाल
कहते हैं कि श्री राम का नाम तो तारक मंत्र हैं। इसके जप करने से जहां आत्मा को सुखानुभूति होती है वहीं परमात्मा के पास जाने का रास्ता भी सुगम होता जाता है। केवल कुछ महीनों में चार करोड़ मंत्र लेखन का काम सभी लोगों के भागीरथ प्रयास से हुआ है। इसमें पांच साल के बच्चों से लेकर नब्बे साल के वृद्ध शामिल हैं। अभी मंत्र लेखन के काम में मुख्यालय के लगभग सौ स्त्री पुरुष जुड़े हुये हैं।
श्री राम लीला भवन के प्रबंधक श्याम गुप्ता कहते हैं कि श्री राम मंत्र लेखन बैंक की स्थापना भवन में कर दी गई है। यहां पर कापियों को जमा करने और देने का प्रभारी बसंत राव गोरे को बनाया गया है। कापियां लोगों को निशुल्क दी जायेंगी।