चित्रकूट। इस परिक्षेत्र का आध्यात्मिक, धार्मिक के साथ ही सांस्कृतिक वैभव अपने आपमें अनूठा है। धर्म नगरी का दर्शन जहां शांति और वैराग्य का संदेश देता है वहीं कर्वी नगर में स्थापत्य कला पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के स्वरुप दिखाई देते हैं। ऐसा ही एक स्थान जिला मुख्यालय से लगे सोनेपुर गांव के समीप 'गणेश बाग' है। भले ही अभी भी इस विशिष्ट स्थान पर देशी और विदेशी पर्यटकों की आवक उतनी न बन पाई हो जितनी की उम्मीद की जाती है पर इतना तो साफ है कि सांस्कृतिक विरासत का धनी स्थान अपने आपमें काफी विशिष्टतायें समेटे हुये है। भले ही इस स्थान का नाम गणेश बाग हो पर यहां पर श्री गणेश की स्थापित एक भी मूर्ति नही है। मूर्ति चोरों की बुरी नजर का परिणाम श्री गणेश की प्रतिमा ही नही बल्कि अन्य विशेष स्थापत्य कला की मूर्तियां बाहर जा चुकी है।
जिला चिकित्सालय के ठीक पीछे को कोटि तीर्थ जाने के मार्ग पर स्थित गणेश बाग के बनने की कहानी भी कम रोचक नही है। मराठा राजवंश की बहू जय श्री जोग बताती हैं कि उनका खानदान प्लासी के युद्ध के बाद बेसिन की संधि में यह क्षेत्र में मिलने के बाद यहां पर आया था। उनके पुरखे पेशवा अमृत राव को कुआं तालाब बाबड़ी आदि बनवाने का काफी शौक था। वैसे उस समय इस शहर का नाम अमृत नगर हुआ करता था। पानी की विशेष दिक्कत होने के कारण भी पानी की व्यवस्था सुचारु रूप से किये जाने के प्रबंध किये गये थे।
महाराष्ट्र से लाल्लुक रखने के कारण श्री गणेश की आराधना उनके खानदान में होती थी। यहां पर इस मंदिर के साथ ही तालाब व बावड़ी का निर्माण कराने के साथ ही विशाल अस्तबल का भी निर्माण कराया गया था।
महात्मा गांधी चित्रकूट गांधी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डा. कमलेश थापक कहते हैं कि बेसिन की संधि के बाद मराठों ने बांदा और चित्रकूट में आकर अपना साम्राज्य स्थापित किया। उनके आने से जहां कुछ नई परंपरायें समाप्त हुयी वहीं मंदिरों, कुओं, तालाबों व बाबडियों का भी निर्माण हुआ।
गणेश बाग भी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। यहां पर स्थापित मूर्तियां खजुराहो शिल्प की तरह ही हैं। पांच मंदिरों के समूह के साथ ही तालाब व अन्य भवन कभी अपने वैभव रहने की की कहानी कहते हैं, पर समय बदलने और आधुनिकता का रंग चढ़ने पर आज यह विशेष स्थान दुर्दशा को प्राप्त हो रहा है। सरकारी स्तर पर किये गये प्रयास नाकाफी है और किसी भी जन प्रतिनिधि को यहां के सांस्कृतिक गौरवों के उत्थान की याद ही नही आती।
सामाजिक चिंतक आलोक द्विवेदी कहते हैं कि सरकार के पास पैसा बेकार के कामों के लिये बहाने को तो है पर गणेश बाग के विकास के लिये शायद नही है। भारतीय पुरातत्व विभाग का एक बोर्ड और चंद चौकीदार ही इसके संरक्षण और संर्वधन के जिम्मेदार बने हुये हैं। सरकारी योजनायें इसके उत्थान के लिये तो बनी पर उनसे गणेश बाग की दशा और दिशा के साथ ही पर्यटकों की आवक नही बढ़ सकी। अगर वास्तव में सही मंशा से गणेश बाग का विकास किया जाये तो पर्यटक यहां पर भी आकर आनंदित महसूस करेंगे। खजुराहो शिल्प की तरह ही इस मंदिर का इतिहास अपने आपमें स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्र शेखर आजाद के यहां पर कई बार रहने का भी गवाह है, पर दुर्भाग्य इस बात का है कि कभी भी किसी ने इस तरह का जिक्र गणेश बाग की इमारत के अंदर बोर्ड लगाकर किया ही नही। पेशवाओं के बनवाये तमाम मकान खंडहर होते रहे और पर्यटक विभाग भी मूक दर्शक की भांति अपनी कार्य कुशलता सिद्ध करता रहा।
Monday, April 26, 2010
चित्रकूट में नहीं भूकंप का खतरा- डा. मिश्र
चित्रकूट। 'चित्रकूट भूकंप प्रभावी क्षेत्र नहीं'। इस बात की तस्दीक महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में मप्र प्रौद्योगिकी परिषद के विश्वविद्यालय प्रकोष्ठ द्वारा सुदूर संवेदी तकनीकी के प्रयोग से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन विषय पर व्याख्यान माला के दौरान भूगर्भ वैज्ञानिक डा. के एस मिश्र ने की। डा. मिश्र हाल ही में भारत सरकार के भूगर्भ सर्वेक्षण के उप निदेशक पद से सेवानिवृत हुये हैं।
उन्होंने कहा कि भूकंप एक ऐसी आपदा है जो बिना सूचना के आती है। गुजरात का कच्छ, हिमांचल प्रदेश तथा पूर्वोत्तर राज्यों में भूकंप आने की अधिक संभावनायें हैं। हमारे देश में मैप तैयार हो चुका है। उसमें चित्रकूट परिक्षेत्र को भूकम्प प्रभावी क्षेत्र से मुक्त रखा गया है।
उन्होंने बताया कि भूकंप की सतह से नीचे 35 मीटर की गहराई से बेसमेंट की चट्टानें अचानक ऊपर उठती हैं और भूकम्प आता है। उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत उपयोगी जल समुद्र में बहकर बेकार चला जाता है। इसे रोकने के उपाय होने चाहिये। गुजरात राज्य में घर-घर में जल प्रबंधन के लिये कार्य किये जा रहे हैं।
कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि पानी की समस्या बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि यहां पर पानी के लिये शोध करने की आवश्यकता है।
इस दौरान विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किये गये। इस दौरान प्रकोष्ठ के समन्वयक डा. रमेश चंद्र त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत कर वैज्ञानिक गतिविधियों की जानकारी दी। विभिन्न संकायों के शिक्षक, डा. अरुप कुमार गुप्ता, डा. रवीन्द्र सिंह, डा. सूर्य कांत चतुर्वेदी, डा. साधना चौरसिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि भूकंप एक ऐसी आपदा है जो बिना सूचना के आती है। गुजरात का कच्छ, हिमांचल प्रदेश तथा पूर्वोत्तर राज्यों में भूकंप आने की अधिक संभावनायें हैं। हमारे देश में मैप तैयार हो चुका है। उसमें चित्रकूट परिक्षेत्र को भूकम्प प्रभावी क्षेत्र से मुक्त रखा गया है।
उन्होंने बताया कि भूकंप की सतह से नीचे 35 मीटर की गहराई से बेसमेंट की चट्टानें अचानक ऊपर उठती हैं और भूकम्प आता है। उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत उपयोगी जल समुद्र में बहकर बेकार चला जाता है। इसे रोकने के उपाय होने चाहिये। गुजरात राज्य में घर-घर में जल प्रबंधन के लिये कार्य किये जा रहे हैं।
कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि पानी की समस्या बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि यहां पर पानी के लिये शोध करने की आवश्यकता है।
इस दौरान विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किये गये। इस दौरान प्रकोष्ठ के समन्वयक डा. रमेश चंद्र त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत कर वैज्ञानिक गतिविधियों की जानकारी दी। विभिन्न संकायों के शिक्षक, डा. अरुप कुमार गुप्ता, डा. रवीन्द्र सिंह, डा. सूर्य कांत चतुर्वेदी, डा. साधना चौरसिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
Saturday, April 24, 2010
बहत्तर प्रतिशत धन खर्च कर बना दिये 219 आदर्श तालाब
चित्रकूट। सरकार की मंशा गांवो में रहने वालों के लिये पुराने सपनों का गांव बनाने की है और इसी मकसद से हर एक गांव में माडल तालाब बनाये जाने के मकसद से काम प्रारंभ की जब कवायत शुरु हुई तो एक बार फिर अतिक्रमण सामने आया। कई गांवों में तो अतिक्रमणकारी न केवल तालाब के भीटे बल्कि पूरा-पूरा तालाब ही निगल चुके थे। खैर सरकार की मंशा के अनुरुप जब जिले भर की तीन सौ तीस ग्राम सभाओं में आदर्श तालाब बनाने के लिये तलाश की गई तो 298 गांवों पुराने तालाब मिल ही गये। मनरेगा जैसी योजना और कड़ी मशक्कत के बाद भी कागजों पर तो अधिकारियों ने 219 तालाबों को आदर्श बनाये जाने की घोषणा कर दी पर वास्तविकता में जिले का एक भी तालाब आदर्श कहलाने लायक बना ही नही क्योंकि तो अभी किसी तालाब में पानी ही नही है और बरसात आने का इन्तजार पौधरोपण कराये जाने के लिये है। सभी तालाबों में तय मानक के अनुसार अभी काम भी पूरे नही हो पाये।
परियोजना निदेशक पी के श्रीवास्तव बताते हैं कि आदर्श तालाब योजना में जिले में कुल 298 तालाबों का चयन किया गया था। हर गांव के एक तालाब को आदर्श बनाया जाना मकसद था। इसमें प्रत्येक आदर्श तालाब में फेन्सिंग, आउट लेट, इनलेट, बैठने के लिये बेंचों की व्यवस्था, फलदार और उपयोगी पौधों का वृक्षारोपण, बोरिंग, गेट का निर्माण तथा विधवा या विकलांग जाब कार्ड धारक को तालाब की देखरेख के लिये तैनात कर उसका भुगतान मनरेगा से किया जाना जैसे काम थे।
उन्होंने बताया कि जिले भर की कुल 330 ग्रामसभाओं में 298 आदर्श तालाबों का रुप देना था। जिनमें से 219 को आदर्श तालाब का रुप दे दिया गया है। शासन से आये तिहत्तर प्रतिशत धन में से बहत्तर प्रतिशत धन को खर्च किया जा चुका है।
कर्वी ब्लाक के खंड विकास अधिकारी कहते हैं कि जब अभी तालाबों में पानी ही नही है तो आउटलेट का निर्माण क्यों कराया जायेगा। बरसात में जब पानी बरसेगा तभी तालाब भरेंगे और बरसात में ही पौधे भी लगाये जायेंगे। 94 ग्राम सभाओं में से कुल 86 तालाबों का ही निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से पैंसठ ही पूरा हो पायें हैं। वैसे इस योजना में काम 60 प्रतिशत मजदूरों से कराया जाना था। यहां पर अधिकारी कहते हैं कि इस नियम का पालन तो किया गया पर पथरौंडी गांव के तालाब में तो जेसीबी से कराई गई खुदाई की शिकायत भी एक बार तहसील दिवस में सामने आई आ चुकी है।
परियोजना निदेशक पी के श्रीवास्तव बताते हैं कि आदर्श तालाब योजना में जिले में कुल 298 तालाबों का चयन किया गया था। हर गांव के एक तालाब को आदर्श बनाया जाना मकसद था। इसमें प्रत्येक आदर्श तालाब में फेन्सिंग, आउट लेट, इनलेट, बैठने के लिये बेंचों की व्यवस्था, फलदार और उपयोगी पौधों का वृक्षारोपण, बोरिंग, गेट का निर्माण तथा विधवा या विकलांग जाब कार्ड धारक को तालाब की देखरेख के लिये तैनात कर उसका भुगतान मनरेगा से किया जाना जैसे काम थे।
उन्होंने बताया कि जिले भर की कुल 330 ग्रामसभाओं में 298 आदर्श तालाबों का रुप देना था। जिनमें से 219 को आदर्श तालाब का रुप दे दिया गया है। शासन से आये तिहत्तर प्रतिशत धन में से बहत्तर प्रतिशत धन को खर्च किया जा चुका है।
कर्वी ब्लाक के खंड विकास अधिकारी कहते हैं कि जब अभी तालाबों में पानी ही नही है तो आउटलेट का निर्माण क्यों कराया जायेगा। बरसात में जब पानी बरसेगा तभी तालाब भरेंगे और बरसात में ही पौधे भी लगाये जायेंगे। 94 ग्राम सभाओं में से कुल 86 तालाबों का ही निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से पैंसठ ही पूरा हो पायें हैं। वैसे इस योजना में काम 60 प्रतिशत मजदूरों से कराया जाना था। यहां पर अधिकारी कहते हैं कि इस नियम का पालन तो किया गया पर पथरौंडी गांव के तालाब में तो जेसीबी से कराई गई खुदाई की शिकायत भी एक बार तहसील दिवस में सामने आई आ चुकी है।
युवराज से मिलने के बाद भी कुटुवा कोल की तो नही बदली किस्मत
चित्रकूट। भले ही कलावती की कहानी कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने भरी संसद में सुनाकर उसकी तकदीर की इबारत सुनहरे लफ्जों में लिख दी हो पर पाठा क्षेत्र के गांव जगन्नाथपुरम के कुटुवा कोल की किस्मत नही बदली। दो साल पहले राहुल गांधी जब उस गांव में आये थे तो उसने उन्हें अपनी समस्या बताई थी। उसका राशन कार्ड आज तक नही बना और उनके आने के बाद मनरेगा में भी कुल एक दिन की मजूदरी के सौ रुपये ही उसे मिल सके हैं। युवा कांग्रेस अध्यक्ष पंकज मिश्र जब इस गांव पहुंचे तो यह तस्वीर सामने आई। युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि गांव में लोगों ने अपनी समस्यायें बताई। इसी गांव के निवासी कुटुवा ने भी अपनी स्थिति बताई तो वे चौंक पड़े। उसने बताया कि न तो उसे नरेगा में एक दिन के अलावा काम मिला और न ही उसका राशन कार्ड बना। इसके साथ ही गांव के आनंदी प्रसाद, सुखनंदन, पचिनिया, कैरी, पंची आदि सैकड़ों मजदूरों को मनेरगा में आज तक औसतन केवल पांच दिनों की ही मजदूरी मिली है। सन् 2007 के बने जाब कार्ड धारकों सत्नेश, भैरम आदि को तो काम ही नही मिला। हिरिया व सुमित्रा जैसी तमाम महिलाओं के तो जाब कार्ड ही नही बनाये गये। विकलांगों और विधवाओं को पेंशन भी नही मिल रही है। इसके साथ ही राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी तमाम समस्यायें भी मिली। भ्रमण में संजय पांडेय, सुरेन्द्र वर्मा, गिरीश मिश्रा व डा. धर्म चौधरी आदि शामिल रहे।
Monday, March 29, 2010
यमुना का पानी बुझायेगा जिले की प्यास
चित्रकूट। पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे जिले के लोगो को शायद अब पीने के लिए भरपूर पानी मिल जाये। मऊ ब्लाक के लगभग सभी गांवों में शुद्ध व सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिये जल निगम की निर्माण निगम इकाई ने यमुना नदी के दो तटों से पानी को लिफ्ट कर लगभग 101 गांवों में पानी देने की योजना का काम प्रारंभ कर दिया है। अधिशाषी अभियंता जल निगम अस्थायी निर्माण खड राम भरोसे बताते हैं कि मऊ ब्लाक के 40 गांवों में पानी देने की योजना पर काम प्रारंभ हो चुका है। इस योजना की कुल लागत 6254.71 लाख रुपये ही है। इस योजना में पूरब पताई गांव में इन्टेकवेल बनाकर पानी को लिफ्ट किया जायेगा। बरगढ़ मोड़ पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर जल का शोधन किया जायेगा। यहां से 40 गांवों की सप्लाई के लिये पाइप डाला जायेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना में सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें जीआई पाइप का इस्तेमाल मेन सप्लाई में नही किया जायेगा। इसके लिये डीआई पाइप डाला जायेगा। हर दो या तीन गांवों के बीच में टंकी बनाई जायेगी। दूसरा प्रस्ताव मऊ कस्बे के पास के घाट से पानी को उठाकर लगभग 61 गांवों को पानी देने की है। इस योजना की लागत 100 करोड़ रुपयों की आयेगी। इसके साथ ही तीसरी योजना यमुना नदी से पानी उठाकर सरैंया होते हुये पाठा के इलाके में पानी देने की है। इस योजना से ऊंचाडीह न्याय पंचायत के तमाम गांवों व मजरों के साथ ही अन्य गांवों को पानी देने की योजना है। इस योजना के लिये अभी सर्वे का काम चल रहा है। मुख्य योजना नगरीय पेयजल पुर्नगठन योजना के अन्तर्गत मुख्यालय में पानी की सप्लाई को 8 एम एल डी से बढ़ाकर 18 एमएलडी करना है। हैंडपंपों के लिये जिम्मेदार विभाग जल निगम के अधिशाषी अभियंता जे पी सिंह कहते हैं कि इस साल उनका नये हैंडपम्पों को लगाने का लक्ष्य 315 का था, जिसके सापेक्ष अब तक 600 से ज्यादा हैंडपम्प लगाये जा चुके हैं। इसके साथ ही लगभग 700 हैंडपम्पों को रीबोर किया जा चुका है।
पर्यटन, पर्यावरण व खेलकूद को नहीं मिला धन
चित्रकूट। भले ही जन प्रतिनिधि यहां जनसभाओं में चित्रकूट को धर्म और पर्यटन का केंद्र बिंदु बताकर शासन से ज्यादा से ज्यादा योजनाएं दिलाने का वादा करते हों मगर हकीकत कुछ और ही है। दरअसल इस साल खेलकूद, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की मद में धन ही नहीं मिला। हालांकि जिला योजना में हर साल प्रस्ताव पास कर भेजा गया मगर इन योजनाओं को शासन से पैसा नहीं मिला।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में फरवरी तक 46 करोड़ तिरसठ लाख पचहत्तर लाख के सापेक्ष अब तक जिले के विभागों को कुल 19 करोड़ उनहत्तर लाख पचासी हजार रुपये मिल चुके हैं। इसमें से 16 करोड अनठानवे लाख छियासी हजार रुपये खर्च हुए हैं। फरवरी तक 86.24 प्रतिशत धनराशि खर्च की जा चुकी है।
अप्रैल 09 में कृषि विभाग, निशुल्क बोरिंग अनुदान, उद्यान विभाग,पशु पालन विभाग, दुग्ध विभाग, मत्स्य विभाग, वन एवं वन्य जीव, सहकारिता,एकीकृत ग्राम्य विकास विभाग, सुखोन्मुख कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, पंचायती राज्य, लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम विकास, सड़क एवं पुल,पर्यावरण, पर्यटन, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, खेलकूद, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य एलौपेथिक, होम्योपैथिक, नगरीय पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, आवास, समाज कल्याण अनु. जाति, पिछला वर्ग कल्याण, अल्प संख्यक कल्याण, समाज कल्याण सामान्य वर्ग, सेवायोजन, आईटीआई, समाज कल्याण वृद्धावस्था व पारिवारिक लाभ, विकलांग कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण व पुष्टाहार आदि विभागों के लिये बजट स्वीकृत किया गया था। इनमें से पुष्टाहार, महिला एवं बाल कल्याण, विकलांग कल्याण,समाज कल्याण वृद्धावस्था व पारिवारिक लाभ, समाज कल्याण सामान्य वर्ग, अल्प संख्यक कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, समाज कल्याण अनुसूचित जाति, नगरीय पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सहकारिता, मत्स्य विभाग, निशुल्क बोरिंग अनुदान में अवमुक्त धन राशि का व्यय कर दिया गया है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने बताया कि हर बार बजट में सभी विभागों के लिए धन का प्रस्ताव भेजा जाता है पर इनमें कुछ को बजट मिलता है तो कई को फूटी कौड़ी नही मिल पाती।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में फरवरी तक 46 करोड़ तिरसठ लाख पचहत्तर लाख के सापेक्ष अब तक जिले के विभागों को कुल 19 करोड़ उनहत्तर लाख पचासी हजार रुपये मिल चुके हैं। इसमें से 16 करोड अनठानवे लाख छियासी हजार रुपये खर्च हुए हैं। फरवरी तक 86.24 प्रतिशत धनराशि खर्च की जा चुकी है।
अप्रैल 09 में कृषि विभाग, निशुल्क बोरिंग अनुदान, उद्यान विभाग,पशु पालन विभाग, दुग्ध विभाग, मत्स्य विभाग, वन एवं वन्य जीव, सहकारिता,एकीकृत ग्राम्य विकास विभाग, सुखोन्मुख कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, पंचायती राज्य, लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम विकास, सड़क एवं पुल,पर्यावरण, पर्यटन, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, खेलकूद, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य एलौपेथिक, होम्योपैथिक, नगरीय पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, आवास, समाज कल्याण अनु. जाति, पिछला वर्ग कल्याण, अल्प संख्यक कल्याण, समाज कल्याण सामान्य वर्ग, सेवायोजन, आईटीआई, समाज कल्याण वृद्धावस्था व पारिवारिक लाभ, विकलांग कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण व पुष्टाहार आदि विभागों के लिये बजट स्वीकृत किया गया था। इनमें से पुष्टाहार, महिला एवं बाल कल्याण, विकलांग कल्याण,समाज कल्याण वृद्धावस्था व पारिवारिक लाभ, समाज कल्याण सामान्य वर्ग, अल्प संख्यक कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, समाज कल्याण अनुसूचित जाति, नगरीय पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सहकारिता, मत्स्य विभाग, निशुल्क बोरिंग अनुदान में अवमुक्त धन राशि का व्यय कर दिया गया है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने बताया कि हर बार बजट में सभी विभागों के लिए धन का प्रस्ताव भेजा जाता है पर इनमें कुछ को बजट मिलता है तो कई को फूटी कौड़ी नही मिल पाती।
लोकगीत विचारों के संप्रेषण का माध्यम : दद्दू प्रसाद
चित्रकूट। लोक संस्कृति की अनमोल परंपरा को अपने आपमें समेटे लोकलय समारोह का आगाज जितना शानदार हुआ उतना ही जोरदार अंजाम भी दिखा।
सूबे के ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद ने कहा कि बुंदेलखंड के प्राण बुंदेलखंड के लोक गीतों में बसते हैं। यहां के गीतों में बुंदेली जीवन शैली और विविधताओं का समूचा दर्शन देखने को मिलता है। दद्दू प्रसाद ने कलाकारों का आह्वान किया कि वे अपने लोक गीतों के माध्यम से लोगों को नये पेड़ लगाने व पुराने पेड़ों की सेवा करने के साथ ही वर्षा जल संचयन का प्रयास करें। आगे नियमों में परिवर्तन कराकर यह प्रयास किया जायेगा कि मनरेगा के प्रचार-प्रसार में उनका सहयोग लिया जाये। इस दौरान उन्होंने लोक कलाकारों के साथ ही लोक मंगल के काम को आगे बढ़ाने वाले कलम के सिपाहियों को भी सम्मानित किया। सदर विधायक दिनेश मिश्र ने संस्थान की बाउन्ड्री बनवाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे आयोजन ही सामाजिक समरसता को बढ़ाने में सहयोगी हैं।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई ने कहा कि कलाकारों के संरक्षण और लोक कलाओं का संवर्धन केवल एक कार्यक्रम को साल भर में आयोजित किये जाने से नहीं हो सकता। निदेशक भागवत प्रसाद ने आभार व्यक्त किया।
सहभागी शिक्षण केंद्र लखनऊ के अशोक भाई व लखनऊ के समाजसेवी संदीप मांझी ने बुंदेली लोक कलाओं को सर्वश्रेष्ठ कलायें घोषित करते हुये कहा कि इनका संरक्षण करना सबका दायित्व है। इस दौरान संगीत विशेषज्ञ डा. वीणा श्रीवास्तव, डा. प्रेम चंद्र, ललितपुर के समाजसेवी वासुदेव, महोबा के अभिषेक, नरैनी के राजा भैया, डा. ओपी सिंह, शिव चरन सिंह महोबा, रामेश्वर प्रसाद, उमा चतुर्वेदी ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान कलाकारों ने भी अपनी-अपनी विधा के कार्यक्रम प्रस्तुत कर वाह-वाही बटोरी।
सूबे के ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद ने कहा कि बुंदेलखंड के प्राण बुंदेलखंड के लोक गीतों में बसते हैं। यहां के गीतों में बुंदेली जीवन शैली और विविधताओं का समूचा दर्शन देखने को मिलता है। दद्दू प्रसाद ने कलाकारों का आह्वान किया कि वे अपने लोक गीतों के माध्यम से लोगों को नये पेड़ लगाने व पुराने पेड़ों की सेवा करने के साथ ही वर्षा जल संचयन का प्रयास करें। आगे नियमों में परिवर्तन कराकर यह प्रयास किया जायेगा कि मनरेगा के प्रचार-प्रसार में उनका सहयोग लिया जाये। इस दौरान उन्होंने लोक कलाकारों के साथ ही लोक मंगल के काम को आगे बढ़ाने वाले कलम के सिपाहियों को भी सम्मानित किया। सदर विधायक दिनेश मिश्र ने संस्थान की बाउन्ड्री बनवाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे आयोजन ही सामाजिक समरसता को बढ़ाने में सहयोगी हैं।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई ने कहा कि कलाकारों के संरक्षण और लोक कलाओं का संवर्धन केवल एक कार्यक्रम को साल भर में आयोजित किये जाने से नहीं हो सकता। निदेशक भागवत प्रसाद ने आभार व्यक्त किया।
सहभागी शिक्षण केंद्र लखनऊ के अशोक भाई व लखनऊ के समाजसेवी संदीप मांझी ने बुंदेली लोक कलाओं को सर्वश्रेष्ठ कलायें घोषित करते हुये कहा कि इनका संरक्षण करना सबका दायित्व है। इस दौरान संगीत विशेषज्ञ डा. वीणा श्रीवास्तव, डा. प्रेम चंद्र, ललितपुर के समाजसेवी वासुदेव, महोबा के अभिषेक, नरैनी के राजा भैया, डा. ओपी सिंह, शिव चरन सिंह महोबा, रामेश्वर प्रसाद, उमा चतुर्वेदी ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान कलाकारों ने भी अपनी-अपनी विधा के कार्यक्रम प्रस्तुत कर वाह-वाही बटोरी।
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